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सुबह-सवेरे पाँच बजे चूड़ियों की खनक, खुरपी की छप्प-छप्प, कुदाली से मिट्टी के ढलों की टूटन, पौधों को जड़ों से उखाड़ने की आवाज़, फिर धरती पर झप-झप, सब कुछ एक लय - एक गति। कुछ ऐसा जो बहुत पुरानी यादों का पिटारा खोलता सा लगा। कुछ ऐसा धरती से जुड़ा संगीत जिसे सुनकर मन प्रफुल्लित हुआ। मैं झट से उठकर…

"मेरे पापा को लाऽओ। मेरे पापा को ल्लाओऽऽ?" ममता दिव्यांग है। देखने में सात आठ वर्ष की लगती है पर है पन्द्रह वर्ष की। कुछ दिन पहले ही उसके पापा का स्वर्गवास एक्सीडेंट से हो गया था। जब पापा थे तब समय से ममता को स्कूल से लाने, ले जाने की जिम्मेवारी बहुत लगन से निभाते थे। धूप, सर्दी, पानी,…

ट्रेन के सिटिंग कम्पार्ट्मेंट में बैठे हम बहुत उत्सुकता से बोलपुर स्टेशन का इंतज़ार कर रहे थे। कोलकाता से बहुत लम्बा रास्ता नहीं था। पर आज बचपन की मुराद पूरी होने जा रही थी। हम शांति निकेतन की यात्रा पर थे। किसी ज़माने में माँ की बहुत इच्छा थी कि मैं शांति निकेतन से ग्रैजुएशन करूँ। बचपन से कहती थीं…

लिओ तोलस्टोय और ऐंटॉन चेकोव को पढ़ने के लिए लोग रूसी भाषा सीखते हैं ताकि उनकी रचनाएँ पूरी तरह समझ सकें। उसी तरह ऋषि व्यास महर्षि और कालिदास को समझने के लिए जर्मन... जी हाँ, जर्मन संस्कृत पढ़ते हैं। ज़्यादा दूर नहीं सिर्फ़ पुदुच्चेरी घूम आइए विदेशी original संस्कृत के ग्रंथ हाथ में लिए मुस्कुराते हुए मिल जाएँगे। माहौल में…

बहुत सही नारा है। हर गली-मुहल्ले, टेलिफोन वार्तालाप, स्कूल, यूनिवर्सिटी की कैंटीन या नुक्कड़ नाटक के dialogue में अक्सर सुनायी पड़ रहा है। Change- yes, Change in what? परिस्थिति, वातावरण, राजनीति या आर्थिक नीति? कहाँ चाहिए change? इस change को लानेवाला कौन है? अलादीन का चिराग़-जिन्न या देश का युवा? जो सोचता बहुत है दम-ख़म भी रखता है पर पहल…

जिसने चेतना को झकझोर दिया। दिसम्बर का महीना, कड़ाके की सर्दी से सारा उत्तर भारत काँप रहा था। चारों ओर कुहासे की चादर फैली हुई थी। आम आदमी क्या पशु-पक्षी भी अपने-अपने नीड़ों में घुसकर सर्दी से बचने का प्रयास कर रहे थे, ऐसे ही समय में मुझे एक अत्यावश्यक कार्य से अपने दो छोटे बच्चों के साथ शहर से…

मेरे सभी पुत्रों और पुत्रियों, मैं अब 93 वर्ष का हो चला हूँ। मैं भारतीय आर्मी का एक सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल हूँ। शायद अभी तक पुराने ज़माने से ताल्लुक रखता हूँ। मैं जीवन के अन्तिम प़ड़ाव में चल रहा हूँ। मैंने विवाह नहीं किया, मेरा अन्य कोई परिवार नहीं है। मेरे जियू (Jew) वंश की आखिरी पहचान मेरे साथ ही…

जब से विद्यालय में मैंने पढ़ाना शुरू किया तब से ही रंगमंच मेरे साथ जैसे जुड़ गया था। बच्चों के साथ जब उन्हें कुछ सिखाने का प्रयास करती तो स्वयं ही कुछ सीख जाती। रंगमंच कितना प्रभावशाली माध्यम है अभिव्यक्ति का! मैंने इसके द्वारा कितने बच्चों के व्यक्तित्व को बदलते हुए देखा है। जो बच्चे पहले संकोची से होते हैं,…

सुबह-सुबह पेड़ों की पत्तियों से छनकर आती सूर्य की किरणें कुछ चमत्कारिक आभास दे रही थीं। यदा-कदा कुछ लोग पार्क में घूमते दिख रहे थे। यहाँ लगे पेड़ कम से कम सौ डेढ़ सौ साल पुराने होंगे। उनके पुख़्ता तने के चारों तरफ़ फैली टहनियाँ और उन पर कूंजती कोयल मौसम बदलने का साफ़ संकेत दे रही थी। तभी कहीं…

माइक पर ईश्वर के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हुए डॉक्टर बेनीप्रसाद भविष्य के युवा लीडर्ज़ को सम्बोधित कर रहे थे। इंडियन हैबिटैट सेंटर में एक शख़्स अपने अजूबे गिटार के साथ प्रविष्ट हुए। उनकी और गिटार की छटा निराली थी। स्वयं भी रोचक आकर्षक व्यक्तित्व के धनी लगे। लम्बे घुंघराले बाल, हाथों में ढेरों फ़्रेंड्शिप बैंड, आँखों में निरीह सौम्यता…

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